उंगलियां

बहुत बार गुम होने के बाद,
मैं पहुंचा हूं यहां तलक !
उंगलियां कब पकड़ी थीं, याद नहीं,
कदम सब अपने ही हैं,
देखते हैं, जाऊंगा कहां तलक !!

राह

जैसे चोटिओं पे बर्फ छटपटाती है समंदर में घुल जाने को,
मेरे होंठ भी तरसते हैं तेरा माथा चूमने को !
फरक इतना बस,
नदीओं के राह बड़े लंबे होते हैं और अपनी मोहब्बत के है ही नहीं !!

अमीरी

वो जाती हुई रो रही थी,
मुझे समझ नहीं आया मेरे लिए या मेरे हिस्से का !
मोहब्बत की परिभाषाएं अगर पेड़ों पे टॅंगी मिल जातीं तो,
सब अमीर ना हो जाते !! 


बहरहाल मुफ़लिसी ही मेरी मिल्कियत है...

खुशी

तू मुझे जान कहे और खुशी मेरी नाक पे फड़फड़ाती रहे !
मैं चूम लूं माथा तेरा और तू दिन भर शरमाती रहे !! 



चली आ कहीं से तो, के ये जो सब पूरा है, तुझ बिन अधूरा हो रह जाए...
कहीं से तो...

इल्ज़ाम

अपने नाम में से मेरा तखलुस हटा लेना,
चाँद पे इल्ज़ाम लगते हैं सितारों से उधारी लेने के !
चांदनी बिखरी है वहां से वहां तलक,
सितारों की छाओं है जहां से जहां तलक !!

किस्से

भूलना मत उसको, कितना भी हरजाई हो !
किस्से नहीं बनते मोहब्बतों के,
गर थोड़ी सी बेवफ़ाई ना हो !!

उलझनें

वो कोरे काग़ज़ों पे लिखता था,
और सफेद चादरों से उलझता था !
वो सिलवटों में उसका लिखा पढ़ती है,
और स्याहीओं से सब सुलझाती है !!

चिंगारी

मोम तो सब जलाते हैं, खुद को भी कभी जला कर तो देखो !
इतना मुश्किल है नहीं,
घर की बात ज़रा बाहर वालों को बता कर तो देखो !!

किनारे

मेरे इश्क़ के किनारे नहीं, बस रवानी है,
मेरे दिल को निचोड़ा बहुत, कभी अपने दिल को डूबा भी जाना !
नियत की बात नहीं, तकदीरों में बेईमानी है,
बहुत से क़र्ज़ लिए हैं तुमने, कुछ क़र्ज़ चुका भी जाना !

ताना-बाना

ये जो बाहर आतिशबाज़ी हो रही है,
या तो कोई चल बसा है या कोई ज़िंदगी सांस लेने लगी है !
मैने नहा धो के आज कपड़े सब नये पहने हैं,
मगर ज़िंदगी फिर पुराने धागों से ताना-बाना बुनने लगी है !