ढूँढो तुम भी

एक मोहब्बत देखी जो कहती थी,
काश तुम मेरी ज़िंदगी में आए होते !
एक ओर मोहब्बत कहती है,
काश तुम मेरी ज़िंदगी में ना आए होते !

मैं फँसी हूं बीच में कहीं, खुद को टटोलती हुई !
तुम भी आओ और ढूँढो मुझे !!

शनाखत

मैने बन्टोरी थी स्याही खैरात में,
वो लफ्ज़ संजोता रहा, लुटाता रहा !
मेरे पास थे रंग सारे,
वो ज़िंदगी की तस्वीर बनाता रहा, मिटाता रहा !

मेरी निगाहें आईना थीं,
वो खुद को संवारता रहा, निखारता रहा !
मैं प्रस्तिश में सर झुकाए बैठा रह गया,
वो सजदे सजाता रहा, उठाता रहा !

वफ़ा की शनाखत मुझसे है,
वो बेवफाओं को अपनाता रहा, आज़माता रहा !!

पतझड़

आओ बेवजह चलें...जिस रास्ते पे सूखी सांसें गिरती हैं किनारे के दरखतों से...
पतझड़ शरमा जाए इस बार अक्खीओं की बरसात से...

इतफ़ाकन

इतफाक जिस रोज़ इक लंबा सफ़र तै कर,
मेरी गोद में आ गिरा था,
उस रोज़ तुम्हारी उंगलियाँ खेल रहीं थी,
मेरी ज़ुल्फों की उलझन से !

इतफ़ाकन उस दिन पूरा हुआ वो,
जो अधूरा था बचपन से !
इतफ़ाकन तब दिल भी कमज़ोर था,
सहारा मिला तेरी धड़कन से !

इतफ़ाकन तेरा सीना भी झुका,
मेरे आँसुओं के वज़न से !!

बददुआ

उसने बददुआ दे दी था, बिछड़ते वक़्त,
के तुम्हे ना मिलेगा चैन कहीं, कितना भी ढूंढना !
अपने एक दिन के आँसुओं के बदले !

अब मुझे जगी रातें फ़िकरे कसती हैं,
काश तुमने भी बददुआ दी होती उसे, दुआ की जगह !


बता यारा, घाटे का सौदा किसका रहा?

परिभाषा

तुम भी आना वहां जहां कुछ ओर ना होगा,
इक प्रेम की परिभाषा के सिवा !
हम रोज़ परिभाषाएं बदलते रहेंगे,
यारा,  पर प्रेम अमर रहेगा !!

मैं चला

कहानी लिखने को चला था,
मैं इक दास्तान बना गया !
इक किरदार नक्काश रहा था,
मैं इक ज़िंदगी निभा गया !

कुद्रतन उठा नींद से तो,
मैं इक ख्वाब जगा गया !
खुली आँखों से ख्वाब देखा तो,
मैं सबको आईना दिखा गया !

मंज़िल ढ़ूंढने निकला था,
मैं सब रास्ते भुला गया !
मैं चला था अकेले,
पीछे इक कारवां चला गया !

मैं तन्हाई में रोया,
गम की महफिलें सज़ा गया !
अपने काँधे से बोझ उतारा तो,
चार का बोझ बढ़ा गया !


मुझे छू के गया था बस,
वो मुझे मोहब्बत सीखा गया !!

सरलता

इक दिन मुझमे से ही आवाज़ आई थी के मोहब्बत को मान लेना ही मोहब्बत है | अब मैने ये भी महसूस किया है के किसी से भरोसा उठ जाने का मतलब उस में से विश्वास उठ जाना नहीं होता |
इतना कहना काफ़ी होगा के मोहब्बत होती सरल है पर निभती बड़ी कठिन है |

बदक़िस्मती

सुना है के लोग अकेले आते हैं, अकेले जाते हैं इस दुनिया से !
इक बदक़िस्मती, यारा, देखो,
के कुछ जीते भी अकेले हैं !!

के वो खत धुल गया था पिछली बारिश में,
जिसमे तुम्हारा साथ था !!

मुआमले

कभी ऐसा भी होगा जब हौड़ ना होगी खुद को छुपाने की,
तुम अपने सारे मुआमले निपटा लेना मुझसे तब,
और सब शिकवे भुलाते रहना !

अभी मुझे थोड़ी ओर मोहलत दे दो खुद को बचाने की,
फिर मैं बना रहूँगा नाचते हुए बंदर की तरह ,
तुम चाबी घूमाते रहना !!