आज का चांद बनाया है मैने एहसासों से...
और उसमे उड़ेली है चांदनी कुछ यादों की...
अंधेरा रंगा है आसमान पे मैने स्याही से...
तारे बिखरा दिए हैं सुलगती सिगरेट की राख से...
उनपे बादलों सी परछाईं है मेरी नींद की...
जाना, रात फिर भी अधूरी है तुम्हारे बिना !
और उसमे उड़ेली है चांदनी कुछ यादों की...
अंधेरा रंगा है आसमान पे मैने स्याही से...
तारे बिखरा दिए हैं सुलगती सिगरेट की राख से...
उनपे बादलों सी परछाईं है मेरी नींद की...
जाना, रात फिर भी अधूरी है तुम्हारे बिना !
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